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जो बीत गया सो बात गई | Hindi Moral Story | दो संतो की कहानी

जो बीत गया उसे याद मत करो | Hindi Moral Story | दो संतो की कहानी 

Short Hindi Moral Story, Hindi Moral Story


दोस्तों हम लोग आज-कल इस भाग-दौड़ वाली जिंदगी में एक छोटे से छोटे दुःख या असफलता को लेकर बैठ जाते हैं, तो आज की इस Moral Story में आप जानोगे की आपको किस तरह उस बात को भूला कर आगे बढ़ते रहना चाहिए।  

बहुत पहले की बात है, एक संत अपने एक शिष्य के साथ यात्रा कर रहे थे। उनके रस्ते में एक नदी नहीं पड़ी जिसे उन्हें पर करना था। जब संत नदी पार करने की तैयारी कर रहे थे, उन्होंने देखा कि एक युवा और सुंदर स्त्री भी नदी पार करने का प्रयास कर रही है। युवती ने पूछा कि "क्या आप मुझे दूसरी तरफ पार करने में मदद कर सकते हैं?

दोनों संतो ने एक दूसरे की ओर देखा क्योंकि उन्होंने एक स्त्री को जीवन भर न छूने का प्रण लिया था।

फिर बिना कुछ कहे, गुरु संत ने स्त्री को उठाया, उसे नदी के उस पार ले गया, उसे धीरे से दूसरी तरफ छोड़ दिया और फिर से अपनी यात्रा की ओर बढ़ने लगा।

उनके शिष्या को विश्वास नहीं हो रहा था कि अभी क्या हुआ है? अपने गुरु के साथ कदम मिलाने के बाद, वह बेचैन था, और उनके बीच एक शब्द के बिना एक घंटा बीत गया दोनों मोन होकर चल रहे थे।

दो घंटे और बीत गए, फिर तीन, अंत में शिष्य खुद को नहीं रोक सका, और उसने पूछा, "संत के रूप में, हमें एक स्त्री को छूने की अनुमति नहीं है, फिर आप उस स्त्री को अपने हाथों से नदी पार कैसे ले जा सकते हैं?"

गुरु संत ने उसकी ओर देखा और उत्तर दिया, "शिष्य, मैंने उस स्त्री को नदी के दूसरी ओर छोड़ दिया, तुम उस घटना को अब भी अपने मन ने क्यों ले जा रहे हो?"

एक स्त्री को कुछ मदद की जरूरत थी इसलिए गुरु संत ने वही किया जो जरूरी था, उसे नदी पार करने के बाद, वहीं छोड़ दिया और चला गया। शायद इस बात ने उसे परेशान भी नहीं किया कि जिसकी वो मदद करने जा रहे हैं, वो मर्द है या औरत। शिष्य संत जो महिला से बचने की कोशिश कर रहा था, उसने उस स्त्री की मदद नहीं की और यह बात उसके दिमाग में चल रही थी।

दोस्तों, लोग अपने जीवन में संघर्ष कर रहे हैं इसका कारण यह है कि उन्होंने अपने मन की प्रकृति को समझने का प्रयास नहीं किया है। जिस तरह शिष्य संत अपने मन में कई घंटों तक उस घटना के बारे में सोचता रहा, इसी तरह लोग भी अपने जीवन की किसी एक बुरी घटना, असफलता या एक दुःख को लेकर बैठ जाते हैं जिससे वह दुःख उनके मन में घर कर जाता है और वो लोग अपने जीवन में आगे नहीं बढ़ पाते हैं।
    
माना की गुरु संत ने अपने वचन का उल्लंघन किया लेकिन उन्होंने वही किया जो उस समय उचित था और उन्होंने न दोबारा उस स्त्री की ओर देखा और ना ही उस घटना के बारे में सोचा, बस अपनी यात्रा को जारी रखा।
दोस्तों, इसी तरह हमें भी अपने जीवन में आगे बढ़ते रहना चाहिए जो बीत गया उसे याद नहीं करना चाहिए नहीं तो वह बहुत दुःख देता है।

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तो दोस्तों आपको ये Short Hindi Moral Story कैसी लगी कमेंट करके जरूर बताना और नीचे दी Hindi Moral Stories को भी जरूर पढ़ें-


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Tags - Hindi Moral Story, Short Moral Story In Hindi

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