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रिश्तों की अहमियत | Hindi Moral Story | Sas Bahu ki kahani

रिश्तों की अहमियत | Hindi Moral Story | Sas Bahu ki kahani

Hindi Moral Story, Heart Touching Story

दोस्तों रिश्ते बनाना जितना आसान है, उससे कई गुना ज्यादा मुश्किल है उन रिश्तों की अहमियत को समझना और उन्हें निभाना| ये Hindi Moral Story इसी बात पर आधारित है| ये कहानी दौ सास और बहु के रिश्ते की अहमियत बताती है

कल माँ के लिए बहुत ख़ुशी का दिन है, उनका जन्मदिन जो है और यहाँ मम्मी जी के चेहरे की चमक और किचन से आती पकवानों की महक को देखकर ये समझ आता है कि दोनों की वजह एक ही है। आज दोपहर में उनकी एक दोस्त आने वाली हैं कल ही मेरे साथ बाजार जाकर अपनी दोस्त को गिफ्ट में देने के लिए मेरी पसंद की महंगी सी एक साड़ी भी ले आईं हैं।

आज सुबह मुझसे भी पहले किचन में घुस गई और बड़े जोश से खुद से बनाई गई पकवानों की लिस्ट में से एक के बाद एक पकवान बनाने भी शुरू कर दिए । बहुत खुश नजर आ रही हैं पर मैं मन न होते हुए भी, बनावटी मुस्कराहट चेहरे पर सजाए काम में उनका हाथ बटा रही हूँ।

मेरी माँ का आज जन्मदिन है लेकिन अब मैं यहाँ(ससुराल में), पापा दफ्तर के काम से बाहेर गए हैं और भाई तो है ही परदेस में। शादी के बाद माँ का यह पहला ऐसा जन्मदिन होगा जब कोई भी उनके साथ नहीं होगा। मायके जाने के बारे में कल मम्मी जी से बात करने ही वाली थी कि मेरे बोलने से पहले ही उन्होंने अपनी दोस्त के आने वाली बात सामने रख दी। दोपहर में खाना और शाम को हम सभी का उनके साथ मेले में जाने का प्रोग्राम तय हो चुका था।

मैं मम्मी जी की बात को इंकार नहीं संती थी, क्या कहती मन मार कर रह गई। घर को अच्छी तरह से सजाया और खुद भी बेमन से तैयार हो गई। कुछ ही देर में दरवाजे की घंटी बजी उनका स्वागत करने के लिए मम्मी जी ने मुझे ही आगे कर दिया। जैसेहि गेट खोला, बड़े से खुशबूदार गुलदस्ते के पीछे छिपा चेहरा जब नजर आया तो मेरी आंखें आश्चर्य से फटीं की फटीं और मुँह खुला का खुला ही रह गया। मेरे सामने मेरी माँ खड़ीं थीं! माँ मुझे गुलदस्ता पकड़ाया और बोलीं, "सरप्राइज"

मैं हैरान खड़ी रह गई, अपनी माँ को निहार रही थी। "जन्मदिन की मुबारकबाद नहीं देगी हमारी दोस्त को?" पीछे से मम्मी जी बोली।
"माँ......आपकी दोस्त, कैसे?"
"मेरी बच्ची झूठ थोड़ी ना कहा था मेने और फिर किसने कहा कि समधिन-समधिन दोस्त नहीं हो सकतीं।" मुश्कुराते हुए मम्मी जी ने कहा।
"हाँ बिल्कुल हो सकती हैं जो सास अपनी बहू को बेटी जैसा प्यार करे सिर्फ वही समधिन दोस्त बना सकती है।" यह कहते हुए माँ ने आगे बढ़कर मम्मी जी को गले लगा लिया। मेरे मुँह से एक शब्द भी ना निकल पाया सा,समझ नहीं आ रहा था कि हसूं या रोऊ? बस मैंने मम्मी जी की हथेलियां पकड़ी और अपनी आंखों से स्पर्श करके होठों से चूम लिया। माँ हम दोनों को देखकर भीगी पलकों के साथ मुस्कुरा रहीं थीं।
जहाँ दोनों मुझे देखकर मुस्कुरा रही हैं वही मैं दोनों के बीच खड़ी अपने आप को खुशकिश्मत मान रही हूँ। एक तरफ मेरी माँ खड़ी हैं जिन्होंने मुझे रिश्तों की अहमियत बताई और दूसरी तरफ मम्मी जी जिनसे मैंने सीखा रिश्तों को दिल से निभाना।

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तो देखा आपने, रिश्ते बनाने के साथ-साथ हमें उन्हें निभाना भी आना चाहिए।
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तो दोस्तों आपको ये Hindi Moral Story कैसी लगी कमेंट करके जरूर बताना और नीचे दी Moral Stories को भी जरूर पढ़ें-


Tags - Hindi Moral Story, Moral Stories in Hindi

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