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पहला और आखिरी दोस्त | Cute Heart Touching Love Story In Hindi |

 पहला और आखिरी दोस्त | Cute Heart Touching Love Story In Hindi | 

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दोस्तों ये Love Story सचमुच आपके दिल को छू जाएगी| ये कहानी एक लड़के के बचपन के बारे में है जिसे खेल-खेल में ही एक लड़की से प्यार हो जाता है, यह एक छोटीसी पर बहुत ही अच्छी प्रेम कहानी है इसलिए इसे आगे जरूर पढ़े - 

इस कहानी में तरुण नाम का एक लड़का है और इशिता नाम की एक लड़की है दोनों की उम्र 14 साल है| यह कहानी इस प्रकार शुरू होती है कि ये गर्मियों का समय था तरुण और उसका परिवार नई सोसाइटी में रहने आये थे| वह सोसाइटी तरुण के लिया नई थी और वह वहां पर किसीको भी नहीं जनता था| यह तरुण का अपने स्कूल में आखिरी दिन था क्योकिं कल से गर्मियों की छुटियाँ लगने वाली थीं| तरुण दोपहर के वक्त घर लौट रहा था, तरुण को सोसाइटी में रहते हुए सिर्फ दो दिन ही हुए थे, चलते चलते रास्ते में उसे किसी लड़की ने पीछे से आवाज़ दी, "हेलो तरुण, कैसे हो तुम?"

जब मैंने पीछे मुड़कर देखा तो एक बहुत ही सुंदर लड़की खड़ी हुई थी| तरुण उससे पूछा "तुम कौन हो और मेरा नाम कैसे जानती हो?" वह बोली "मेरा नाम इशिता है, मैंने तुम्हारी मम्मी और तुम्हे मैंने बात करते हुए सुना था तब मुझे तुम्हारा नाम पता चला|"

मैं इशिता के पास गया और हाथ मिलाया| उसकी आवाज़ बहुत मधुर थी| फिर दोनों बात करते हुए सोसाइटी के मेन गेट तक चले गए, इशिता बोली "मैं यहीं पास वाली कॉलोनी में रहती हूँ, मेरे सारे दोस्त गर्मी की छुटी के लिये गाँव चले गये क्या मैं तुम्हारे साथ खेलने आ सकती हूँ?" 

तरुण ने मुस्कुराते हुए कहा "ज़रूर क्यों नहीं जरुर आओ और वैसे मैं भी यहाँ नया हूँ किसी को जनता भी नहीं हूँ और मेरी बिल्डिंग के बच्चे भी अपने-अपने गाँव चले गए हैंतुम 5:30 बजे आ जाना मेरे घर के पास एक गार्डन है हम वहां बेड-मिन्टन खेलेंगे| वह खुश हो कर घर चली गई और फिर 5:30 बजने का मैं इंतज़ार करने लगा| मैं 5 बजे ही रैकेट लेकर गार्डन में पहुँचा गया लेकिन इशिता मुझसे पहले ही आकर वहां बेंच पर बैठी हुई थी|

तरुण उसके बाजु में जाकर बैठ गया और उसने इशिता से पूछा कि तुम कबसे यहापर बैठी हो| वह बोली "बस तुम्हारे आने से 5 मिनट पहले, चलो हम टेनिस खेलते है|" उसने मुस्कुराते हुए कहा|

फिर उन दोनों ने हसी मज़ाक करते हुए टेनिस खेला| इशिता कफी अच्छा टेनिस खेल लेती थी| बादमे दोनों ने थोड़ी देर बैठकर बहुत सारी बातें की| तरुण ने इशिता से पूछा कि तुम्हें क्या-क्या पसंद है? उसने बताया कि उसे टेनिस खेलना पसंद है, पुराने गाने सुनना पसंद हैऔर खाने में सबसे ज्यादा चावल की खीर पसंद है| 

फिर दोनों हर रोज़ गार्डन में मिलने लगे, तरुण कभी-कभी इशिता के लिए अपनी मम्मी के हाथों बनी चावल की खीर ले जाता था| इशिता बड़े मजे से खाती और तरुण की मम्मी की तारीफ भी करती थी| धीरे-धीरे तरुण को अब इशिता बहुत अच्छी लगने लगी थी क्योंकि उसे उससे प्यार जो हो गया था| 

एक दिन अचानक इशिता नहीं आयी उस दिन तरुण शाम के 7 बजे तक गार्डन में अकेले ही उसका इंतज़ार करता रहा| फिर वह उदास होकर घर वापस लौट गया, घर पहुंचकर तरुण केवल यही सोचता रहा कि इशिता आज उससे मिलने क्यों नहीं आयी? फिर उस रात  तरुण के साथ एक अजीब सी घटना घटी!

इशिता तरुण के सपने में आयी और बोली "तुम्हारे साथ वक़्त बिताकर मुझे अच्छा लगा तरुण, अब मेरे जाने का समय हो चूका है| मुझे मुक्ति दो तरुण मुक्ति दो… " तरुण सुबह ही 4: 30 बजे डरके मारे अचानक उठा गया, वह पसीने से नहाया हुआ था| उसे लगा कि वह इशिता के बारे में कुछ ज्यादा ही सोचने लगा है| फिर दुसरे दिन भी उसने इशिता का इंतजार किया फिर भी वह नहीं आयी| उसके बाद से इशिता हर रात तरुण के सपने में आने लगी और बार-बार एक ही बात कहती थी कि "मुक्ति दो तरुण मुक्ति दो...."

अगले दिन तरुण ने ठान ली थी की अगर आज वह नहीं आई तो मैं उससे मिलने उसके घर चला जाऊंगा! तरुण ने मम्मी से इशिता के लिए खीर बनवा ली और शाम होने से पहले ही इशिता के घर पंहुच गया और दरवाजा खटखटाया| लेकिन दरवाज़ा एक बुज़ुर्ग आदमी ने खोला उन्होंने नर्म आवाज में पूछा "तुम्हे किस्से मिलना है बेटा?" तरुण ने इशिता का नाम बताया| उन्होंने उसे अन्दर बुलाया, तरुण जाकर सोफे पर बैठा गया और खीर बुज़ुर्ग को दे दी और कहा "ये खीर इशिता के लिए है, कहाँ है वह मुझे उससे मिलना है?" और कहा की पूरे दो दिन हो गए वह पार्क में खलने भी नहीं आयी! 

बुज़ुर्ग अंकल शान्ति से मेरे सामने सोफे पर बैठे और बोले " बेटा आज के ही दिन 1 साल पहले इशिता का ये दुनिया छोड़ कर चली गई थी| बचपन ने कोई इशिता को मेरे घर के सामने छोड़ गया था उसे जन्म से ही एक बीमारी थी इसलिए किसी बच्चे के मम्मी-पापा अपने बच्चों को उसके साथ खलने नहीं देते थेवह हमेशा घर पर अकले उदास बैठी रहती थी वह हमेशा से चाहती थी कि उसके साथ भी कोई खेलने आये पर यह कभी सच ना हो सका और  आखिर में पिछले साल वह चल बसी|

इशिता का ये सच सुनने के बाद तरुण की आंखे छलक गई, उसे इस बात पर विश्वास नहीं हो रहा था की अब तक वह एक आत्मा के साथ खेलता और घूमता था!  फिर तरुण ने उस बुज़ुर्ग को अब तक की सारी बात बताई और उसे आने वाले सपनो के बारे में भी बता दिया| वह बोले "बेटा, शायद आज उसकी आखरी ख्वाइश पूरी कर दी है और अब तुम ही हो जो उसके पहले और आखिरी दोस्त हो और उसे मुक्ति दिला सकते हो|" 

अब तरुण साडी बातें समझ चुका था, थोड़ी ही देर में वंहा पंडित जी आ गए और इशिता की आत्मा कि शांति के लिया एक पूजा हुई| उसके दादाजी(बुजुर्ग आदमी) ने वह पूजा तरुण के हाथों से करवाई ताकि उसकी आत्मा को मुक्ति मिल सके फिर पूजा ख़त्म होने के बाद तरुण अपने घर चला गया|

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दोस्तों  ये थी आज की Love Story, उम्मीद करता हूँ कि आपको ये Heart Touching Love Story पसंद आई होगी| आपको ये कहानी किसी लगी नीचे Comment करके जरूर बताना और नीचे दी गई Love Stories को भी जरूर पढ़िएगा - 

1. दिल की बातें - Most Popular Story

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Tags - Love story in Hindi heart touching, Short Love Story In Hindi

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